पौष मास में क्यों करनी चाहिए सूर्य देव की पूजा, क्या है पूजा विधि

शास्त्रों के अनुसार पौष मास में सूर्य देव की उपासना बहुत लाभकारी है। पौष मास में सूर्य देव 11 हजार रश्मियों के साथ व्यक्ति को स्वास्थ्य प्रदान करते हैं इसलिए पौष मास में सूर्य की उपासना की जाती है। मान्यता है इस महीने चन्द्रमा पुष्य नक्षत्र में रहता है इसलिए यह पौष मास कहलाता है।

हिन्दू पंचांग का दसवां महीना पौष के नाम से जाना जाता है। स्थानीय भाषा में इसको अगहन कहा जाता है। हर महीने का अपना अलग महत्व है और पौष मास की भी हिन्दू पंचांग में अपनी अलग महत्ता है लेकिन पौष मास में शुभ कार्यों की मनाही रहती है। पौष में शादी, विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, जनेऊ संस्कार आदि नहीं किये जाते हैं। हिन्दू पंचांग ग्रहों और नक्षत्रों की गति पर आधारित है। शास्त्रों के अनुसार पौष मास में सूर्य देव की उपासना  बहुत लाभकारी है। पौष मास में सूर्य देव 11 हजार रश्मियों के साथ व्यक्ति को स्वास्थ्य प्रदान करते हैं इसलिए पौष मास में सूर्य की उपासना की जाती है। मान्यता है इस महीने चन्द्रमा पुष्य नक्षत्र में रहता है इसलिए यह पौष मास कहलाता है।

कब से शुरू हो रहा है पौष मास 

हिन्दू पंचांग के अनुसार 2022 पौष मास की शुरुआत 9 दिसम्बर से हो रही है। यह 7 जनवरी 2023 को समाप्त होगा।

पौष मास में सूर्य की उपासना 

हिन्दू पंचांग के अनुसार हर मास किसी ना किसी देवता को समर्पित है। इसी तरह पौष मास में सूर्य देवता की उपासना का महत्व है। यह सूर्य देव का मास कहलाता है। पौष मास में सूर्य देव की उपासना और अर्ध्य का विधान है। पौष में रविवार के व्रत का भी बहुत महत्व है। कहते हैं पौष में सूर्य की उपासना करने से व्यक्ति साल भर निरोगी और प्रसन्न रहता है।

पौष मास में कैसे करें सूर्य की उपासना 

1-  पौष मास में प्रातः जल्दी उठकर स्नान करें

2-  एक ताम्बे लोटे में जल लें उसमें लाल फूल और लाल चन्दन या लाल रोली मिलाये और सूर्य देव को अर्ध्य दें। 

3-  अर्ध्य देते समय सूर्य देव के नाम का उच्चारण करें।

4-  उसके बाद  ‘ॐ श्री सूर्य देवाय नमः’ का जाप करें

5-  पौष मास में रविवार को मीठा भोजन करें।

6-  सूर्य देव को तिल और खिचड़ी का भोग लगाएं

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पौष माष का महत्व 

पौष मास में सभी शुभ कार्यो को रोक दिया जाता है। इस समय सूर्य देव धनु राशि में प्रवेश करते हैं इसलिए कोई मांगलिक नहीं किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार अगर इस मास में अपने पितरो का पिंड दान किया जाये तो उनकी आत्मा को शांति मिलती है और उनको बैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है। इसलिए इसे छोटा पितृपक्ष भी कहा जाता है। मान्यता के अनुसार जो भी व्यक्ति पौष मास में सूर्य की उपासना करता है उसको स्वास्थ्य, बुद्धि, धन, और बल की प्राप्ति होती है।

पौष मास में करें यह उपाय

पौष मास में गुड़ का सेवन लाभदायक बताया गया है। इस मास में गर्म वस्त्रो का दान करना चाहिए। पौष मास में रविवार को लाल वस्त्र धारण करने चाहिए। पीले वस्त्र धारण करने से भी पौष में लाभ होता है। इस मास में अदरक और लौंग का सेवन बहुत लाभदायक माना गया है।

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