श्राद्ध में करें श्रीमद्भागवत गीता का पाठ… पितरों को मिलेगी शांति

ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि श्राद्धकर्म से पितृगण के साथ देवता भी तृप्त होते हैं। श्राद्ध-तर्पण हमारे पूर्वजों के प्रति हमारा सम्मान है। इसी से पितृ ऋण भी चुकता होता है। श्राद्ध के 16 दिनों में अष्टमुखी रुद्राक्ष धारण करें। श्रद्धा से किया गया कर्म श्राद्ध कहलाता है। अपने पितरों के लिए श्रद्धा …

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