Vivah Muhurat 2023: नए साल 2023 में खूब बजेंगी शहनाइयां, शुभ मुहूर्त की भरमार

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि हिन्दी पंचांग के अनुसार साल 2023 में विवाह के कुल 59 शुभ मुहूर्त हैं। इनमें जनवरी में 9, फरवरी में 13, मई में 14, जून में 11, नवंबर में 5 और दिसंबर में 7 विवाह मुहूर्त हैं।

नए साल 2023 में शादियों के शुभ मुहूर्त की भरमार है। बिना शुभ मुहूर्त के विवाह कार्यक्रम नहीं किए जा सकते हैं। वर्ष में कई मौके आते हैं जब विवाह के कई शुभ मुहूर्त होते हैं वहीं कुछ महीनों तक विवाह के मुहू्र्त ही नहीं होते हैं। पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि हिंदू धर्म में विवाह संपन्न करने के लिए शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व होता है। बिना शुभ मुहूर्त के विवाह कार्यक्रम नहीं किए जा सकते हैं। वर्ष में कई मौके आते हैं जब विवाह के कई शुभ मुहूर्त होते हैं वहीं कुछ महीनों तक विवाह के मुहूर्त ही नहीं होते हैं।

शादी के लिए शुभ दिन और तिथि 

ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि धर्म और ज्योतिष में जिस तरह शादी के लिए शुभ मुहूर्त और शुभ योग बताए गए हैं। उसी तरह शादी करने के लिए शुभ दिन और शुभ तिथियां भी बताई गईं हैं। इन दिन और तिथि में शादी करना बहुत शुभ होता है। इससे दांपत्य जीवन खुशहाल रहता है। पति-पत्नी के भाग्य में वृद्धि होती है। ज्योतिष के मुताबिक शादी करने के लिए सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार को सबसे अनुकूल माना जाता है। जबकि मंगलवार को विवाह के लिए अशुभ माना जाता है। इसी तरह शादी करने लिए द्वितीया तिथि, तृतीया तिथि, पंचमी तिथि, सप्तमी तिथि, एकादशी तिथि और त्रयोदशी तिथि बेहद शुभ होती है। साथ ही शादी के लिए अभिजीत मुहूर्त सबसे शुभ होता है। इसके अलावा गोधुली बेला में शादी करना उत्तम होता है।

साल 2023 में विवाह के 59 शुभ मुहूर्त

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि हिन्दी पंचांग के अनुसार साल 2023 में विवाह के कुल 59 शुभ मुहूर्त हैं। इनमें जनवरी में 9, फरवरी में 13, मई में 14, जून में 11, नवंबर में 5 और दिसंबर में 7 विवाह मुहूर्त हैं। नए साल यानि वर्ष 2023 का पहला सावा 15 जनवरी को होगा। बसंत पंचमी, रामनवमी, भड़ल्या नवमी, अक्षय तृतीया सहित कई अबूझ सावे भी होंगे। मार्च 2023 में होलाष्टक और अप्रैल में खरमास लगने पर मांगलिक कार्य नहीं होंगे। 29 जून से चातुर्मास शुरू हो जाएगा। अधिकमास होने से पांच महीने चातुर्मास रहेगा। इससे देवशयनी एकादशी 29 जून से 23 नवंबर देवउठनी एकादशी तक सावे नहीं हो सकेंगे। देवउठनी एकादशी का अबूझ सावा रहेगा। इसके बाद लग्न मुहूर्त शुरू होंगे

आईए विश्वविख्यात भविष्यवक्ता और कुंडली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास से जानते है वर्ष 2023 के शुभ मुहूर्तं-

साल 2023 में विवाह के शुभ मुहूर्त

जनवरी 2023- 15, 16, 18, 19, 25, 26, 27, 30, 31

फरवरी 2023- 6, 7, 8, 9 10, 12, 13, 14, 15, 17, 22 23, 28

मई 2023- 4, 6, 8, 9, 10, 11, 15, 16, 20, 21, 22, 27, 29, 30

जून 2023- 1, 3, 5, 6, 7, 11, 12, 23, 24, 26, 27

नवंबर 2023- 23, 24, 27, 28, 29

दिसंबर 2023- 5, 6, 7 8, 9, 11, 15

(कुछ पंचांग में भेद होने के कारण तिथि घट बढ़ सकती है और परिवर्तन हो सकता है।)

इस साल जुलाई, अगस्त, सितम्बर, अक्टूबर में शादी के कोई शुभ मुहूर्त नहीं बन रहा है।

विवाह मुहूर्त में लग्न का महत्व

कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि शादी-ब्याह के संबंध में लग्न का अर्थ होता है फेरे का समय। लग्न का निर्धारण शादी की तारीख तय होने के बाद ही होता है। यदि विवाह लग्न के निर्धारण में गलती होती है तो विवाह के लिए यह एक गंभीर दोष माना जाता है। विवाह संस्कार में तिथि को शरीर, चंद्रमा को मन, योग व नक्षत्रों को शरीर का अंग और लग्न को आत्मा माना गया है यानी लग्न के बिना विवाह अधूरा होता है।

क्यों मिलाई जाती है कुंडली

विश्वविख्यात भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि रीति-रिवाज और पंचांग के अनुसार विवाह में वर और वधू के बीच दोनों की कुंडलियों को मिलाया जाता है। इस व्यवस्था को कुंडली मिलान या गुण मिलान के नाम से जानते हैं। इसमें वर और कन्या की कुंडलियों को देखकर उनके 36 गुणों को मिलाया जाता है। जब दोनों के न्यूनतम 18 से 32 गुण मिल जाते हैं तो ही उनकी शादी के सफल होने की संभावना बनती है। बहुत से ऐसे लोग हैं जिनके गुण मिलान में 24 से 32 गुण तक मिलते हैं लेकिन वैवाहिक जीवन बहुत ही दुश्वारियों भरा होता है। इसका मुख्य कारण यह है कि पुरुष-स्त्री दोनों के जीवन का अलग-अलग विश्लेषण करने से पता चलता है।

– डा. अनीष व्यास

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक

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